क्षमी दाता गुणग्राही स्वामी दुःखेन लभ्यते ।
अनुकूलः शुचिर्दक्षो राजन् भृत्योअपी दुर्लभः ।।
{ भोजप्रबन्ध ~ 93 }

सहनशील, उदार और गुणों की पहचान करने वाला स्वामी बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है । मनोनुकूल, पवित्र विचार रखने वाला एवं कार्यकुशल सेवक भी बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है ।

Tolerant, generous and one who recognizes qualities, such a master is very difficult to get. And a servant who is pleasing, having good thoughts and expert at work is also very difficult to get. { Bhojprabandh ~ 93 }

 

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